इंडियन आर्मी ट्रेनिंग कैसे ओर कहा होती है

इंडियन आर्मी ट्रेनिंग कैसे ओर कहा होती है

July 8, 2018 8 By Admin

भारतीय सेना विश्व की तीसरी सबसे बड़ी तथा शाक्तिशाली आर्मी है। इंडियन आर्मी लगभग 13 लाख है तथा लगभग 24 लाख रिजर्व्ड सेना है। यह अपनी शक्ति तथा शौर्य प्रदर्शन से पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इसकी शक्ति के पीछे मूल कारण इसके सैनिको की शसक्त ट्रेनिंग तथा आधुनिक हथियार है। आज हम बात करेंगे इंडियन आर्मी ट्रेनिंग के बारे में। इंडियन सोल्जर को ट्रेनिंग के दौरान किन किन चैलेंजेज का सामना करना पड़ता है।

जैसा कि हम सब जानते है कि indian army join करने के लिए जवानों को कठोर Physical Fitness test पास करना पड़ता है उसके बाद ही वो भारतीय सेना में नियुक्त हो पाते है। यदि आपको इंडियन आर्मी जॉइन करने के बारे में पता नही है तो आप हमारी नीचे दी गयी पोस्ट पढ़ सकते है जिसमे Indian Army Recruitment का पूरा तरीका दिया गया है।

इंडियन आर्मी को कैसे जॉइन करे, योग्यता तथा विभिन्न टेस्ट की जानकारी।

इंडियन आर्मी ट्रेनिंग सेन्टर अलग अलग शहरों में है जहाँ पर जिस आर्म्स का ट्रेनिंग सेन्टर है केवल उसी के जवानों की ट्रेनिंग चलाई जाती है। भारतीय सेना का ट्रेनिंग का एक ही मोटो है

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Army Recruitment Office से भर्ती होने के बाद जवान ARO द्वारा अलॉट किये गए इंडियन आर्मी ट्रेनिंग सेन्टर में जाते है वहां पर उनका डाक्यूमेंट्स वेरीफाई होता है तथा रिमेडिक्ल किया जाता है उसके बाद उन्हें सेक्शन में बाट दिया जाता है। एक सेक्शन में लगभग 20 कैंडिडेट होते है। इंडियन आर्मी ट्रेनिंग के समय जवानों को रिक्रूट कहा जाता है। इसके बाद शुरू होती है उनकी आर्मी ट्रेनिंग।

List of Indian Army Training Centre

S NoArmsTraining Centre
1Electrical Mechanical Engineering (EME)Secunderabad
2Army Service Corps (ASC)Banglore
3Army Education Corp (AEC)Panchmarhi
4Corps of SignalJabalpur & Goa
5Army Medical CorpsLucknow
6Corps of Military PoliceBanglore
7Artillery training centreDeolali
8Armed training centreAhmednagar
9Army Air DefenceGopalpur odisha


इंडियन आर्मी ट्रेनिंग मुख्यत दो भागों में बीती होती है। Basic Military Training जो कि Indian Army जॉइन करने वाले सभी जवानों के लिए अनिवार्य है तथा बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग के बाद होती है टेक्निकल ट्रेनिंग जो कि रिक्रूट के ट्रेड के अनुसार होती है। आज हम बात करेंगे Basic Military Training(BMT) के बारे में।

Basic Military Training का समय 20 सप्ताह का होता है जिसमे एक सिविलियन को पूरी तरह से फ़ौज के अनुसार ढाल दिया जाता है। इंडियन आर्मी की इस ट्रेनिंग के दौरान जवान को हर वो पहलू सिखाया जाता है जिससे वो शारीरिक, मानसिक तथा स्वभाविक रूप से मजबूत हो। इस ट्रेनिंग में जवान को मुख्यत 4 प्रकार की ट्रेनिंग दी जाती है।

फिजिकल फिटनेस ट्रेनिंग

यह इस ट्रेनिंग का मुख्य हिस्सा है। बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग में लगभग 60% फिजिकल फिटनेस पर ध्यान दिया जाता है। सुबह में जवानों से फिजिकल ट्रेनिंग करवाई जाती है जिसमे रनिंग, एक्सरसाइज, push up, pull up, front roll, back roll, vertcal rope तथा horizontal rope प्रमुख है। कहने के लिए सुबह फिजिकल ट्रेनिंग का टाइम एक से दो पीरियड (लगभग डेढ़ घण्टा) होता है परंतु इसके अलावा आपकी या आपके साथी की गलती से 24 घण्टे में फ्रंट रोल तथा बैक रोल (फिजिकल ट्रेनिंग) कभी भी शुरू हो सकते है 😀😀😀। यदि आप कोई गलती नही भी करते है तो गलती डुंड ली जाती है।

इंडियन आर्मी ट्रेनिंग

इंडियन आर्मी फ्रंट रोल


ये सब ट्रेनिंग फौजी को केवल शारीरिक तथा मानसिक रूप से मजबूत नही बल्कि सहनशील भी बनाती है।

दूसरी ट्रेनिंग जो बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग में दी जाती है वो है ड्रिल ट्रेनिंग। हर साल जो हम गणतंत्र दिवस पर परेड देखते है उसे ही ड्रिल कहते है और इसकी ट्रेनिंग भी इसी 20 वीक के दौरान दी जाती है। इसके लिए आर्मी के पास स्पेशल इंस्ट्रक्टर होते है तथा वो रिक्रूट को जीरो से हीरो बना देते है। ड्रिल ही वो चीज है जो आर्मी में जवानों को रहन सहन, खान पान, पहनावा तथा डिसिप्लिन सिखाती है। फ़ौज में हर एक काम के लिए ड्रिल बनी हुई है और हर एक काम को ड्रिल के अनुसार करना होता है।

आर्मी ट्रेनिंग

Indian army drill training


फिजिकल फिटनेस ट्रेनिंग तथा ड्रिल ट्रेनीग के अलावा जो महत्वपूर्ण ट्रेनिंग दी जाती है वो है वेपन ट्रेनिंग(हथियार की ट्रेनिंग). इंडियन आर्मी ट्रेनिंग का यह भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस ट्रेनिंग में जवानों को राइफल्स के बारे में डिटेल से सिखाया जाता है। इस ट्रेनिंग के दौरान भी फिजिकल फिटनेस पर जोर दिया जाता है। इंडियन आर्मी वेपन ट्रेनिंग का एक ही मोटो है।

एक गोली एक दुश्मन

इसी मोटो के साथ भारतीय सेना को हथियार की ट्रेनिंग दी जाती है

आर्मी ट्रेनिंग हथियार

इसमें राइफल का रखरखाव उसको जोड़ना, खोलना, उसके हिस्से तथा विभिन तरीको से चलाने सम्बन्धित सिखलाई दी जाती है। इसमे जवानों को अलग अलग हथियार से शूटिंग करना पड़ता है तथा शूटिंग में पास होना भी आवश्यक है। इंडियन आर्मी के फिजिकल की तयारी 3 महीने में करने के लिए नीचे की पोस्ट जरूर पढ़ें

इंडियन आर्मी रैली के फिजिकल की तयारी 3 महीने में कैसे करे


इंडियन आर्मी ट्रेनिंग में इसके अलावा भी आर्मी की सरचना, रैक्स, आर्मी रोल इन फील्ड एंड पीस एरिया, adminstrative डयूटी तथा मानचित्र पढने के बारे में भी ट्रेनिंग दी जाती है। इंडियन आर्मी की इस 20 सप्ताह की ट्रेनिंग में एक सिविलियन को पूरी तरह से फ़ौज के माहौल में डाल दिया जाता है। समय समय पर ऊपर बताई गई ट्रेनिंग के टेस्ट होते है जिसमे रिक्रूट का पास होने बेहद जरूरी है। फैल होने की स्थिति में रिक्रूट को दोबारा उस ट्रेनिंग को करना पड़ता है। अब हम बताएंगे कि Indian Army Training के दौरान एक रिक्रूट की दिनचर्या क्या रहती है।

इंडियन आर्मी ट्रेनिंग के दौरान रिक्रूट की दिनचर्या

    • सबसे पहले रिक्रूट लगभग 3:30 AM या 4:00 AM उठता है तथा उसके बाद वो तैयार होता है ट्रेनिंग के लिए
    • फिजिकल ट्रेनिंग से पहले उसे अपने रिहायसी इलाके को मेन्टेन करना पड़ता है तथा लगभग 530 AM PT(Physical Training) शुरू हो जाती है।
    • सामान्य रूप से PT 40 मिनट की होती है जिसमे ऊपर बताये गए सभी एक्सरसाइज करवाई जाती है।
    • लगभग 7 बजे के आसपास रिक्रूट नास्ता करते है और 8 बजे दोबारा ट्रेनिंग पीरियड शुरू हो जाता है।
    • इसके बाद 8 बजे से लगभग 1 बजे तक उसकी ट्रेनिंग चलती है जिसमें उसे ड्रिल, वेपन ट्रेनिंग, PT (फिजिकल ट्रेनिंग के पीरियड दोबारा आ सकता है) तथा अन्य ट्रेनिंग कराई जाती है।


आर्मी ट्रेनिंग हॉरिजॉन्टल रोप

आर्मी ट्रेनिंग हॉरिजॉन्टल रोप

8 से 1 बजे तक सभी सेक्शन की अलग अलग पीरियड होता है (जैसे स्कूल में सभी सेक्शन के अलग अलग सब्जेक्ट्स के पीरियड होते है)। इसके दरण उन्हें बीच बीच मे 5 मिनट का ब्रेक टाइम भी मिलता है।

  • 1 बजे से 230 तक रिक्रूट लंच करते गए तथा अपने पर्सनेल काम करते है।
  • इसके बाद लगभग 3 बजे से 430 बजे तक वो अपने ट्रेनिंग के एरिया को मेन्टेन करते है तथा 430 बजे से 6 बजे तक सभी रिक्रूट को गेम खिलाया जाता है।
  • गेम के टाइम आप अपनी पसंद का गेम जैसे वॉलीबॉल, फुटबॉल, हॉकी इत्यादि खेल सकते है।
  • 6:30 के बाद रिक्रूट फ्री हो जाते है तथा अपने पर्सनेल काम करते है। उसके बाद 8 बजे जवान डिनर करते है तथा निर्धारित नाईट ड्यूटी करते है।

सामान्य रूप से जवान की दिनचर्या यही रहती है। इसमे थोड़ा बहुत समय के साथ बदलाव आता रहता है।

इंडियन आर्मी ट्रेनिंग की सुविधाएं तथा फायदे

Indian army training में काफी कुछ सीखने को मिलता है तथा रिक्रूट एक एडवेंचर लाइफ जीता है। training के साथ साथ सैनिक खेल में पार्टिसिपेट कर सकते है। सेना में भी ट्रेनिंग के दौरान अलग अलग खेल में कॉमेटिशन होते है तथा अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय तथा अंतरास्ट्रीय स्तर तक खेलते है। भारतीय सेना के कुछ प्रमुख खिलाड़ी जिन्होंने न केवल ओलिंपिक में पार्टिसिपेट किया बल्कि देश के लिए ओलिंपिक में मैडल जीतकर देश का नाम भी रोशन किया। इन खिलाड़ियों में राज्यवर्धन सिंह राठौर, मिल्खा सिंह, विजय कुमार, जीतू रॉय तथा राम सिंह यादव है इनके अलावा भी बहुत सारे खिलाड़ी है जिन्होंने कॉमन वेल्थ, एशियाई खेल तथा अंतराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत के लिए पदक जीते। भारतीय सेना खेलो को बहुत बढ़ावा देती है इसलिए आप ट्रेनिंग में अपने मन पसन्द खेल चुन सकते है।

इंडियन आर्मी ट्रेनिंग स्पोर्ट्स टीम

Indian army sports

इसके अलावा सेना में अलग अलग प्रतियोगिता होती है जिसमे आप अपनी कला का प्रदर्शन कर सकते है।

रिक्रूट के लिए मनोरंजन के लिए एक मनोरंजन कक्ष होता है जिसमे TV, म्यूजिक सिस्टम, इंडोर गेम्स होते है। रिक्रूट को हर सप्ताह थिएटर में एक फ़िल्म भी दिखाई जाती है। ट्रेनिंग के बाद जवान अपनी सिविल एजुकेशन भी बडां सकते है। जवानों को अच्छा खाना, मेडिकल सुविधा तथा साल में एक फ्री रेलवे टिकट तथा बाकी 50% ट्रैन में कन्सेशन दिया जाता है।

20 सप्ताह की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग के बाद जवानों को एक महीने की छुट्टी भेजा जाता है तथा उसके बाद उनको टेक्निकल ट्रेनिंग के लिए निर्धारित मिलिट्री रेजिमेंट में भेज दिया जाता है जहाँ पर सैनिक के ट्रेड अनुसार उसकी ट्रेनिंग चलती है। अलग अलग ट्रेड की ट्रेनिंग की ड्यूरेशन(समय) अलग अलग होता है।

सब ट्रेनिंग खत्म होने के बाद जब रिक्रूट पूरी तरह अपने ट्रेड तथा मिलिट्री आपरेशन के लिए सक्षम हो जाता है तब उसकी पासिंग आउट परेड (कसम परेड)होती है तथा वह रिक्रूट से एक पूर्णतया सोल्जर बन जाता है।

इस ट्रेनिंग के दौरान उसके बहुत सारे दोस्त बनते है जो कि अलग अलग राज्य से सम्बंधित होते है इसलिए जवान को उनकी भाषा, संस्कृति, रीति रिवाज आदि सीखने को मिलती है। रिक्रूट को अलग अलग जगह पर जिम्मेवारी मिलती है जिससे उसकी लीडरशिप क्वालिटी भी विकसित होती है। जब एक रिक्रूट ट्रेनिंग करने के बाद सिविल में जाता है तो उसके पहनावे, बातचित के ढंग, एटीट्यूड से वह जेंटलमैन लगता है।


दोस्तो आप लोग जब सेना को जॉइन करोगे ओर वो लाइफ जिओगे तो आपको पता चलेगा कि वाकई इतनी मुस्किलो के बावजूद वो लाइफ जीने में कितना मजा है। हमे कमेंट करके बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी और हा यदि आपका कोई दोस्त आर्मी के लिए तयारी कर रहा हो या ट्रेनिंग के लिए जा रहा हो तो उसके साथ एक बार जरूर शेयर करना ताकि वो इससे मोटीवेट हो सके और ट्रेनिंग के लिए फिजिकली तथा मेंटली तयार हो सके।

जय हिंद जय भारत

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