पैरा कंमांडो (स्पेशल फ़ोर्स) कैसे जॉइन करते है, ट्रेनिंग शेड्यूल तथा सैलरी की पूरी जानकारी।

पैरा कंमांडो (स्पेशल फ़ोर्स) कैसे जॉइन करते है, ट्रेनिंग शेड्यूल तथा सैलरी की पूरी जानकारी।

November 17, 2018 4 By Admin

जब भी भारतीय सेना की बहादुरी के किस्सों का जिक्र होता है तब पैरा कमांडो (स्पेशल फ़ोर्स) की बात होना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। पैरा कमांडो केवल भारत की ही नही बल्कि विश्व की टॉप स्पेशल फ़ोर्स में से एक है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि पाकिस्तान के अंदर घुसकर पाकिस्तान की जमीन पर पाकिस्तान को पटखनी देना यह पैरा कमांडो ने ही किया था जिसे हम गर्व से सर्जिकल स्ट्राइक के नाम से जानते है।

पैरा कमांडो का सिलेक्शन का तरीका

सबसे पहला पर्शन यह उठता है कि क्या पैरा कमांडो इंडियन आर्मी के सोल्जर में से ही बनते है या उन्हें डायरेक्ट सिविल से सेलेक्ट किया जाता है। पैरा कमांडो का सिलेक्शन दो प्रकार से होता है

  1. डायरेक्ट रिक्रूटमेंट
  2. इंडियन आर्मी से सिलेक्शन

डायरेक्ट रिक्रूटमेंट में जवानों को सिविल से आर्मी रैली के द्वारा भर्ती किया जाता है आर्मी रैली पैरा (पैराशूट) कमांडो ट्रेनिंग सेन्टर बंगलोर में कराई जाती है तथा वहां पर सिलेक्टेड कैंडिडेट को पैरा कमांडो की कठिन ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। बंगलोर के अलावा अन्य स्थानों पर उत्कर्ष प्र्दशन तथा शारीरिक मापदंड वाले जवानों को भी पैरा ट्रेनिंग सेन्टर में पैरा कमांडो की ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है।

यदि इंडियन आर्मी में सर्विस कर रहे जवान पैरा रेजिमेंट को जॉइन करना चाहे तो वह वालंटियर होकर अप्लाई कर सकते है। अप्लाई करने के लिए जवान को अपने कमांडिंग अफसर की रिकमेन्डेशन लेनी होती है। किसी भी यूनिट का कमांडिंग अफसर उसी जवान को पैरा कंमांडो के लिए रिकमेंड करता है जो फिजिकली तथा मेंटली रूप से मजबूत हो। किसी भी आर्मी रेजिमेंट के लिए यह गौरव की बात होती है जब उसका जवान पैरा कंमंडो की ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी करके “बलिदान पद” को पहनता है।

Para commando

आपकी जानकारी के लिए बतादे की डायरेक्ट रिक्रूटमेंट तथा आर्मी यूनिट से आये हुए सभी जवान पैरा कंमांडो नही बनते है। केवल 2% से 5% ही पैरा कंमांडो स्पेशल फ़ोर्स को जॉइन कर पाते है। पैरा कंमांडो स्पेशल फ़ोर्स जॉइन करने से पहले किसी भी जवान का पैराट्रूपर होना अनिवार्य है उसके लिए पहले उन्हें paratrooper की ट्रेनिंग लेकर पैराट्रूपर का टेस्ट क्लियर करना होता है। पैराट्रूपर बनने के बाद ही पैरा कंमांडो स्पेशल फ़ोर्स एडवांस ट्रेनिंग के लिए अप्लाई कर सकते है। पैराट्रूपर में जवान को फ्लाइट जम्प करना होता है जो कि एक अलग टॉपिक है जिसके बारे में हम अलग पोस्ट में बात करेंगे।

Paratrooper fly jump

पैरा कंमांडो स्पेशल फ़ोर्स मैरून रंग की कैप पहनते है तथा उनके कंधों पर PARA रेजिमेंट सिंबल होता है। पैरा कंमाडो स्पेशल फ़ोर्स का सिलेक्शन विश्व की टॉप कंमांडो जैसे यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी Q कोर्स तथा यूनाइटेड किंगडम स्पेशल फ़ोर्स सिलेक्शन से भी अधिक कठिन माना गया है। PARA कंमांडो बनने के बाद कैंडिडेट के पास दो ऑप्शन रहते है या तो वो सिर्फ para कंमांडो रहे या फिर एडवांस ट्रेनिंग के लिए अप्लाई करके Para commando special force जॉइन करे। Para commando स्पेशल फ़ोर्स जॉइन करने के लिए Para कंमांडो बनना अनिवार्य है। यदि आप PARA COMMANDO तथा PARA COMMANDO SPECIAL FORCE के जवानों को पहचानना चाहे तो दोनों में दो अंतर होते है। PARA Commando स्पेशल फ़ोर्स के जवान की बाजू पर SPECIAL FORCE का सिंबल होता है तथा उनकी वर्दी में बलिदान बैज लगा होता है जो कि PARA Commando नही पहनते है।

Para commando badge

अब बात करते है पैरा कंमांडो की ट्रेनिंग की।

Para Commando training

Para स्पेशल फ़ोर्स की ट्रेनिंग 4 भाग में होती है। पैरा स्पेशल फ़ोर्स का हिस्सा बनने के लिए कैंडिडेट का बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग करना आवश्यक है। बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग कैंडिडेट की पैरेंट यूनिट में होती है यानी पैरा कंमांडो बनने के लिए कैंडिडेट का सबसे पहले इंडियन आर्मी जॉइन करना अनिवार्य है तथा बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ही कैंडिडेट अपनी यूनिट से para commando के लिए अप्लाई कर सकते है।

इसके पश्चात कैंडिडेट की सब डॉक्यूमेंट की कार्यवाही की जाती है तथा कैंडिडेट का कम्पलीट मेडिकल टेस्ट किया जाता है तथा मेडिकली फिट कैंडिडेट को ही para commando सिलेक्शन के लिए भेजा जाता है।

पैरा स्पेशल फ़ोर्स का सिलेक्शन 90 दिन के दौरान किया जाता है जिसमे कैंडिडेट को बहुत टफ फिजिकली तथा मेंटली टेस्ट से गुजरना पड़ता है इस 90 दिन के पीरियड को प्रोबेशन टाइम कहा जाता है तथा कैंडिडेट को प्रोबेशनर कहा जाता है इस 90 दिन के दौरान कैंडिडेट कभी भी para commando ट्रेनिंग को छोड़कर जा सकता है। इस समय के दौरान सभी कैंडिडेट को एक तरह से ट्रीट किया जाता है चाहे वह किसी भी रैंक का क्यो न हो। जो इस 90 दिन के प्रोबेशन पीरियड को सफलतापूर्वक कम्पलीट करता है उसे पैराशूट रेजिमेंट में भेज दिया जाता है। प्रोबेशन पीरियड के दौरान मुश्किल टेस्ट होने के कारण बहुत सारे प्रोबेशनर बीच मे ही छोड़कर अपनी पैरेंट यूनिट में चले जाते है तथा 7 -12 % ही इसे सफलतापूर्वक पास कर पाते है।

प्रोबेशन के दौरान ट्रेनिंग टेस्ट

शुरुआत में प्रोबेशनर को फिजिकल तथा स्किल ट्रेनिंग कराई जाते है। इस दौरान प्रोबेशनर को एक स्थान से दूसरे स्थान जाना, कम्युनिकेशन technique, मैप रीडिंग, भाषाएं सीखना, हथियार की ट्रेनिंग, मेडिकल ट्रेनिंग इत्यादि स्किल की ट्रेनिंग दी जाती है। para commando स्पेशल फ़ोर्स की फिजिकल ट्रेनिंग तथा मेन्टल ट्रेनिंग सबसे ज्यादा मुश्किल होती है। इस ट्रेनिंग के दौरान दुश्मन के एरिया में घुसना, बाहर निकलना, आपरेशन को अंजाम देना इत्यादि की ट्रेनिंग भी कराई जाती है।

एक महीने की कठोर फिजिकल तथा मेन्टल एक्सरसाइज के बाद शुरू होती है असली ट्रेनिंग। इस दौरान पैरा कंमांडो का 36 घण्टे का टेस्ट होता है। यह टेस्ट शुरू होता है 10 किलोमीटर स्पीड मार्च के साथ जिसमे ट्रेनीज के पास 30 किलोग्राम वॉर लोड होता है जैसे वेपन, पानी, बैग, जरूरी सामान तथा इसके अतिरिक्त 40 किलोग्राम वेट भी दिया जाता है। इस पूरे समान के साथ प्रोबशनर को 10 किलोमीटर स्पीड मार्च करना होता है। स्पीड मार्च खत्म होने के बाद वेट शिफ्टिंग टेस्ट होता है जैसे अपने साथी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेकर जाना तथा काफी समय तक उसे उठाकर रखना, पानी की टँकी शिफ्ट करना, गाड़ी के बड़े बड़े टायर एक स्थान से दूसरे ले जाना या लकड़ी के ब्लॉक शिफ्ट करना। वेट शिफ्टिंग टेस्ट में 40 से 85 किलोग्राम तक वेट दिया जाता है जिसे काफी देर तक उठाकर रखना होता है या एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेकर जाना होता है।

Para commando training

इस टेस्ट के दौरान ट्रेनीज को पहले 16 घण्टे तक पानी या खाना बिल्कुल भी नही दिया जाता है जिससे उसके स्टैमिना तथा सहनशीलता की कड़ी परीक्षा होती है। इसके बाद अंडर वाटर टेस्ट किया जाता है जिसमे कैंडिडेट को पानी मे बार बार डॉय जाता है तथा उसे कम से कम सांस लेने के लिए हवा दी जाती है इसके बाद प्रोबेशनर के हाथ रस्सी से बांधकर पानी मे डाला जाता है तथा बीच बीच मे उसे रस्सी से खिंचा जाता है। यह टेस्ट बहुत मुश्किल होता है तथा बहुत सारे प्रोबेशनर इस टेस्ट तक आते आते withdraw कर लेते है। इस टेस्ट में प्रोबेशनर को मुश्किल से सांस आता है तथा कई बार कैंडिडेट बेहोश तक हो जाते है।

Para commando routine

इसके पश्चात प्रोबेशनर का ऑपरेशनल एक्सरसाइज टेस्ट होता है जिसमे उसे लड़ाई के दौरान होने वाली रियल सिचुएशन दी जाती है और उसे प्रत्येक वस्तु को याद रखना होता है तथा ऑपरेशनल एक्सरसाइज को सफलतापूर्वक कम्पलीट करना होता है। इसके पश्चात दोबारा 10 किलोमीटर स्पीड मार्च होता है तथा उसके पश्चात 6 घण्टे तक लगातार एक्सरसाइज कराई जाती है। 36 घण्टे के लगातार इस टेस्ट स्पीड मार्च के बाद कैंडिडेट की कॉम्बैट स्किल( लड़ाकू कौशल) का परीक्षण लिया जाता है जिसमे प्रोबेशनर को एम्बुश लगाना, कैम्प बनाना, स्ट्रेचर बनाना, आपरेशन के एरिया में घुसना तथा बाहर निकलना इत्यादि कराया जाता है।

कॉम्बैट स्किल टेस्ट 36 घण्टे के इस टेस्ट में सबसे अंत मे कराया जाता है तथा उस वक्त तक प्रोबेशनर को सोने नही दिया जाता तथा वह बहुत थका हुआ होता है ऐसे में प्रोबेशनर का असली मेन्टल तथा फिजिकल टेस्ट होता है। इस प्रकार 36 घण्टे का टेस्ट कम्पलीट हो जाता है। 36 घण्टे के इस टेस्ट के दौरान बहुत सारे प्रोबेशनर छोड़ कर अपनी यूनिट में चले जाते है तथा कुछ प्रोबेशनर ही रहते है जिन्हें बचे हुए टेस्ट में परफॉर्म करना होता है। इसके पश्चात 100 किलोमीटर रनिंग होता है जिसमे प्रोबेशनर के पास 10 किलोग्राम बैटल लोड तथा 7 किलोग्राम की राइफल होती है इस रनिंग को सामान्यतः 13 घण्टे से 15 घण्टे में पूरा किया जाता है। इस रनिंग को भी 4 स्टेज में बाटा जाता है।

जो इस टेस्ट को पास कर लेते है उन्हें लास्ट के 65 दिन से 90 दिन तक अंतिम टेस्ट पास करना होता है जिसमे उन्हें काउंटर टेरर आपरेशन को पास करना होता है। जो प्रोबेशनर इन सभी टेस्ट को पास कर लेते है वही पैरा कंमांडो के लिए सेलेक्ट किये जाते है तथा मैरून कैप पहन पाते है। जब सिलेक्टेड कैंडिडेट बलिदान पद तथा मैरून कैप पहनते है वह समय उनके लिए बहुत ही खुशी तथा गौरव का क्षण होता है। इस प्रकार से पैरा कंमांडो का सिलेक्शन किया जाता है तथा उसके बाद शुरू होती है कंमांडो की एडवांस ट्रेनिंग।

Para commando की ट्रेनिंग लगातार चलती रहती है तथा लगभग 3.5 वर्ष लग जाते है एक कम्पलीट पैरा कंमांडो बनने में। पैरा कंमांडो स्पेशल फ़ोर्स का डेली रूटीन सुबह 20 किलोमीटर की रनिंग तथा फिजिकल एक्सरसाइज के साथ होता है। इसके बाद उन्हें अलग अलग स्किल्स जैसे दुश्मन के इलाके में घुसना, बाहर निकलना, पैराशूट फ्री फॉल जम्प, डाइविंग करना, एम्बुश लगाना तथा दुश्मन के एम्बुश को विफल करना, इंटेलिजेंस इकठ्ठा करना, काउंटर टेररिस्ट आपरेशन, गुररेल्ला लड़ाई, मार्शल आर्ट ट्रेनिंग, तनाव में फायरिंग करना, हथियार के बारे में एडवांस ट्रेनिंग, फर्स्ट एड ट्रेनिंग, सर्वाइवल स्किल्स इत्यादि की ट्रेनिंग एक निश्चित प्रोग्राम के अंतर्गत कराई जाती है।

Para commando salary & training

Para commando special force को हर प्रकार के वातावरण, कंडीशन तथा हर प्रकार की लड़ाई के लिए अच्छे तरीके से तैयार किया जाता है इसलिए उन्हें ट्रेनिंग के लिए अलग अलग स्थानों पर अलग अलग तरीके की ट्रेनिंग दी जाती है। मरुस्थलीय लड़ाई के लिए desert warfare school Rajasthan, पहाड़ी एरिया में आपरेशन के लिए High Altitude Warfare school Sonamarg (J&K), काउंटर इंसर्जेंसी तथा जंगल वारफेयर के लिए Counter Insurgency & warfare School मिज़ोरम, पानी मे गोताखोर ट्रेनिंग के लिए Naval Diving School Kochi में पैरा कंमांडो को भेजा जाता है।

Para Commando स्पेशल फ़ोर्स को विश्व की टॉप commando फ़ोर्स में गिना जाता है और यही कारण है कि यूनाइटेड स्टेट्स स्पेशल आपरेशन कमांड तथा यूनाइटेड किंगडम स्पेशल फ़ोर्स ने भी इंडियन पैरा कंमांडो स्पेशल फ़ोर्स के साथ जॉइंट एक्सरसाइज की है तथा इंडियन पैरा स्पेशल फ़ोर्स के साथ स्किल्स ट्रेनिंग एक्सचेंज की है।

Para commando स्पेशल फ़ोर्स आपरेशन

Para commando special force, National Security Guard(NSG), MARCOS तथा गरुड़ कंमांडो भारत की टॉप मोस्ट स्पेशल फ़ोर्स है जो अपने अपने क्षेत्र में निपुण है जब भी देश मे किसी टफ आपरेशन को अंजाम देना होता है तो इन्ही commando forces को बुलाया जाता है इन सभी मे पैरा कंमांडो की संख्या सबसे ज्यादा है। पैरा कंमांडो स्पेशल फ़ोर्स ने अब तक बहुत सारे आपरेशन को अंजाम दिया है। हाल ही में पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादियों के लॉन्चिंग पैड नष्ट करना तथा आतंकवादियों को मारकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देना, म्यामार के जंगलों में घुसकर टेररिस्ट एनकाउंटर, साम्भा में काउंटर इंसर्जेंसी आपरेशन इत्यादि पैरा कंमांडो द्वारा ही सफलतापूर्वक किये गए थे।

इसके अलावा भी पैरा कंमांडो ने 1966 से लेकर अब तक बहुत सारे आपरेशन को अंजाम दिया है 1971 इंडिया पाकिस्तान युद्ध, 1999 कारगिल युद्ध, श्रीलंका में आपरेशन पवन, 1988 में मालदीव में आपरेशन कैक्टस, सिएरा लियोन में आपरेशन खुकरी में अहम भूमिका थी जिसमे इन्हें सफलतापूर्वक आपरेशन को अंजाम दिया।

Para Commando Special Allowance

पैरा कंमांडो स्पेशल फ़ोर्स इतनी मेहनत करते है, रिस्क उठाते है तथा अन्य डिफेंस पर्सन की तुलना में काफी संघर्षपूर्ण रूटीन को फॉलो करते है इसलिए उन्हें स्पेशल allowance भी दिया जाता है। para कंमांडो स्पेशल फ़ोर्स को SPECIAL FORCE ALLOWANCE दिया जाता है जो 7वे वेतन आयोग में बढ़कर अफसर के लिए 25000 रुपये प्रति महीना तथा JCO और अन्य रैक्स के लिए 17300 रुपये प्रति महीना दिया जाता है। इसके अलावा Para allowance भी para commando को दिया जाता है जो स्पेशल फ़ोर्स जॉइन नही करते है तथा पैराशूट रेजिमेंट जॉइन करते है। Para कंमांडो के अलाउंस की डिटेल्स नीचे टेबल में दी गयी है।

Allowance/CategoryAmount/Month
Special Force Allowance
Officer25000
JCO/ORs17300
Para Allowance
Officer10500
JCO/ORs6000

ऊपर टेबल में दिए गए स्पेशल अलाउंस है जो कि पैरा कंमांडो स्पेशल फ़ोर्स तथा पैरा कंमंडो को दिए जाते है इसके अतिरिक्त इन्हें रैंक अनुसार आर्मी की सैलरी तथा अन्य अलाउंस भी मिलते है।

दोस्तो ये थी पैरा कंमांडो स्पेशल फ़ोर्स की जानकारी। उम्मीद करते है कि आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी। आप अपनी राय नीचे कमेंट करके दे सकते है तथा पोस्ट को फेसबुक पर अवश्य शेयर करे।

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