इंडियन आर्मी रैंक कौन कौन से है तथा उन्हें कैसे पहचाने




इंडियन आर्मी विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आर्मी है जिसमे कुल 13,95100 सैनिक है। आज हम बात करेंगे Indian army ranks के बारे में। इंडियन आर्मी रैंक दो प्रकार के रैंक है कमीशन रैंक तथा नॉन कमीशन रैंक। इसके अलावा भी इंडियन आर्मी में जूनियर कमीशन रैंक होता है जो कि नॉन कमीशन रैंक के सोल्जर प्रमोशन प्राप्त करके जूनियर कमीशन रैंक के अधिकारी बनते है।

सर्वप्रथम हम बात करेंगे Indian army Non commission ranks की।

इंडियन आर्मी रैंक (नॉन कमीशन)

इंडियन आर्मी में नॉन कमीशन रैंक सिपाही से हवलदार तक होते है। जब भी कोई सिविलियन जवान आर्मी भर्ती के द्वारा सिपाही रैंक में भारतीय सेना जॉइन करता है तो वह इस केटेगरी में आता है। इंडियन आर्मी रैंक में सबसे पहले आता है सिपाही रैंक।

1. सिपाही

भारतीय सेना में सबसे अधिक संख्या इसी रैंक की है। सिपाही का रोल सुपरवाइजर का न हो कर ऑपरेशनल का होता है मतलब ग्राउंड टास्क आर्मी में मुख्यत इन्ही का होता है। जब भी कोई सिविलियन नॉन कमीशन केटेगरी में सेना जॉइन करता है तो सर्वप्रथम उसे इसी रैंक में भर्ती किया जाता है। इंडियन आर्मी में जनरल ड्यूटी, नर्सिंग असिस्टेंट, सोल्जर टेक्निकल तथा ट्रेड्समैन इसी रैंक में भर्ती होते है।

पहचान




सिपाही रैंक में ड्रेस पर कोई भी फीता (chevron) नही लगा होता है। कंधे पर उसकी रेजिमेंट या कोर का सिंबल रहता है। सिपाही को सिग्नलमैन, गनर तथा राइफलमैन भी कहा जाता है।

Indian army rank sepoy

रिटायरमेंट

सिपाही 20 वर्ष तक सर्विस कर सकते है।

2. लांस नायक

सिपाही प्रमोशन प्राप्त करने के पश्चात लांस नायक बनते है। लांस नायक यूनिट प्रमोशन भी होता है जिसमे योग्य सैनिकों को लांस नायक बनाया जाता है। इंडियन आर्मी के टेक्निकल ट्रेड में सिपाही लांस नायक की बजाय डायरेक्ट नायक भी बनते है।

पहचान

लांस नायक के बाएं बाजू पर एक v शेप का फीता (chevron) लगा होता है।

Indian army rank lance naik

रिटायरमेंट

लांस आर्मी में कुल 22 वर्ष सर्विस या 48 वर्ष आयु जो भी पहले आ जाये।

3. नायक

Indian Army Rank (नॉन कमीशन) में यह तीसरा रैंक है। इंडियन आर्मी में नायक बनने के लिए कम से कम 3 वर्ष की सर्विस होनी चाहिए तथा वेकेंसी के आधार पर योग्य सिपाही/ लांस नायक को नायक के रैंक पर प्रमोट किया जाता है।

यदि कोई सिपाही 8 वर्ष की सर्विस तक नायक नही बनता है तो MACP (Military Assured Career Progression) स्कीम के अंतर्गत 8 वर्ष सर्विस होने के पश्चात उसे नायक रैंक के सभी बेनिफिट दिए जाते है।

पहचान

नायक की ड्रेस की बाए बाजू पर V शेप के दो फीता (Chevron) होते है।

Indian army rank Naik

रिटायरमेंट

नायक आर्मी में 22 वर्ष तक सर्विस कर सकते है तथा 2 वर्ष की सर्विस बढ़ा सकते है।

4. हवलदार

Non commission Army rank में यह सबसे उच्च रैंक है। इंडियन आर्मी में हवलदार बनने के लिए कम से कम 5 वर्ष सर्विस होनी चाहिए। हवलदार बनने के लिए इंटरमीडिएट कैडर कोर्स पास करना अनिवार्य होता है तथा वेकैंसी ओर योग्यता के आधार पर हवलदार रैंक में प्रमोट किया जाता है।

हवलदार को भारतीय सेना में सीनियर NCO भी कहा जाता है । हवलदार आर्मी यूनिट में CHM (कंपनी हवलदार मेजर), BHM (बटालियन हवलदार मेजर) तथा RHM (रेजिमेंट हवलदार मेजर) की ड्यूटी भी करते है।

यदि कोई नायक 16 वर्ष तक हवलदार नही बनता है तो MACP के अंतर्गत उसे हवलदार रैंक के सब बेनिफिट मिलते है।

पहचान

हवलदार के बाएं बाजू पर V आकर के तीन फीत (chevron) रहती है।

Indian Army Rank Havildar

रिटायरमेंट

हवलदार 24 वर्ष तक सर्विस कर सकते है तथा 2 वर्ष की सर्विस बढ़ा सकते है।

इंडियन आर्मी रैंक (जूनियर कमीशन)

अब बात करते है जूनियर कमीशन रैंक की। भारतीय सेना में जूनियर कमीशन रैंक 3 होते है जिनकी डिटेल नीचे दी गयी है।

नायब सूबेदार

नायब सूबेदार के पद पर योग्य हवलदार को वेकैंसी तथा योग्यता के आधार पर प्रमोट किया जाता है। नायब सूबेदार बनने के लिए कम से कम 10 वर्ष सर्विस होना अनिवार्य है। भारतीय सेना में रिलीजियस टीचर (RT JCO) डायरेक्ट नायब सूबेदार के रैंक पर सेना को जॉइन करते है। नायब सूबेदार बनने के लिए हवलदार को सीनियर कैडर कोर्स पास करना अनिवार्य होता है।

यदि 24 वर्ष की सर्विस तक हवलदार नायब सूबेदार के रैंक पर प्रमोट नही होता है तो MACP स्कीम के अंतर्गत उन्हें नायब सूबेदार के सभी बेनिफिट दिए जाते है।

पहचान

नायब सूबेदार वर्दी में दोनों शोल्डर पर 5 मुखी स्टार पहनते है तथा शोल्डर पर स्ट्रिप लगी होती है।

Indian army rank Naib Subedar

रिटायरमेंट

नायब सूबेदार सेना में 28 वर्ष तक सर्विस कर सकते है जिसमे 2 वर्ष तक सर्विस एक्सटेंशन भी शामिल है।

सूबेदार

सूबेदार के रैंक पर नायब सूबेदार को प्रमोट किया जाता है। सूबेदार रैंक को आर्म्ड तथा कविलरी में रिसालदार कहा जाता है। नायब सूबेदार से सूबेदार बनने के लिए JLC (जूनियर लीडरशिप कोर्स) पास करना अनिवार्य है।

पहचान

सूबेदार वर्दी में दोनों शोल्डर पर दो दो स्टार लगाते है तथा साथ मे स्ट्रिप भी लगी होती है।

Indian army rank subedar

रिटायरमेंट

सूबेदार आर्मी में 28 वर्ष तक सर्विस या 52 वर्ष की ऐज दोनो में जो पहले हो जाये। 28 वर्ष के अतिरिक्त 2 वर्ष का एक्सटेंशन भी कर सकते है।

सूबेदार मेजर




सूबेदार मेजर आर्मी में जवानों के लिए सर्वोच्च रैंक होता है। कोई भी जवान सिपाही रैंक में भर्ती होने के पश्चात सूबेदार मेजर के रैंक तक पहुच सकता है। इसके पश्चात अच्छी सर्विस करने वाले सूबेदार मेजर को होनररी रैंक से सम्मानित भी किया जाता है। सूबेदार मेजर रैंक तक केवल कुछ सोल्जर ही पहुच पाते है। सूबेदार मेजर का चयन वेकैंसी तथा सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर किया जाता है।

पहचान

सूबेदार मेजर अपने दोनों कंधों पर अशोक स्तम्भ लगाते है तथा साथ मे स्ट्रिप भी लगी होती है।

Indian army rank subedar major

रिटायरमेंट

सूबेदार मेजर सेना में 30 वर्ष तक सर्विस कर सकते है तथा 2 वर्ष का एक्सटेंशन भी कर सकते है।

अब बात करते है आर्मी में कमीशन रैंक की। जब भी कोई सिविलियन आर्मी अफसर एंट्री के द्वारा जॉइन करता है तो लेफ्टिनेंट के पद पर जॉइन करता है। आर्मी में कमीशन रैंक नीचे दिए गए है।

Commission Rank in Army

लेफ्टिनेंट

Commission rank में लेफ्टिनेंट पहला रैंक होता है। कमीशन के पश्चात अफसर लेफ्टिनेंट के पद पर जॉइन करते है।

पहचान

लेफ्टिनेंट की ड्रेस में दोनो कंधों पर दो दो स्टार लगे होते है तथा कमीशन रैंक में स्ट्रिप नही होती है।

इंडियन आर्मी रैंक लेफ्टिनेंट

कैप्टेन

कमीशन के 2 वर्ष के बाद लेफ्टिनेंट से कैप्टेन के रैंक पर प्रमोट किया जाता है।

पहचान

कैप्टेन अपने दोनों कंधों पर तीन तीन स्टार पहनते है

इंडियन आर्मी रैंक कैप्टेन

मेजर

सेना में अधिकारी को कैप्टेन से मेजर रैंक में प्रमोट किया जाता है। मेजर बनने के लिए कमिशन के बाद 6 वर्ष की सर्विस होनी चाहिए।

पहचान

मेजर अपनी ड्रेस में दोनों कंधों पर अशोक स्तंभ पहनते है।

इंडियन आर्मी रैंक मेजर

लेफ्टिनेंट कर्नल

इंडियन आर्मी में मेजर को लेफ्टिनेंट कर्नल के रैंक पर प्रमोट किया जाता है। लेफ्टिनेंट कर्नल बनने के लिए कॉमिशन के बाद 13 वर्ष सर्विस होनी चाहिए।

पहचान

लेफ्टिनेंट कर्नल अपनी वर्दी के दोनों कंधों पर एक स्टार तथा एक अशोक स्तंभ पहनते है।

इंडियन आर्मी रैंक लेफ्टिनेंट कर्नल

कर्नल

इंडियन आर्मी रैंक के कमीशन रैंक में यह पांचवा रैंक है। सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल को सिलेक्शन के द्वारा कर्नल रैंक में प्रमोट किया जाता है। कर्नल रैंक के लिए कमीशन के बाद 15 वर्ष सर्विस होनी चाहिए।



यदि लेफ्टिनेंट कर्नल का सिलेक्शन कर्नल के लिए नही होता है तो 26 वर्ष सर्विस के बाद Time Scale (TS) कर्नल के लिए प्रमोट किया जाता है। कर्नल की सैलरी pay level 13 के अंतर्गत आती है।

पहचान

कर्नल अपनी ड्रेस के दोनों शोल्डर में अशोक स्तंभ तथा दो दो स्टार पहनते है तथा कॉलर में मैरून रंग के कॉलर पैच लगाते है जो कि कमांडिंग अफसर का सिंबल होते है।

इंडियन आर्मी रैंक कर्नल

रिटायरमेंट

कर्नल रैंक में आर्मी अधिकारी 54 वर्ष आयु तक सर्विस कर सकते है।

इंडियन आर्मी रैंक ब्रिगेडियर

भारतीय सेना में कर्नल रैंक के अधिकारी को ब्रिगेडियर के रैंक पर सिलेक्शन के द्वारा प्रमोट किया जाता है। ब्रिगेडियर बनने के लिए कमिशन के बाद कम से कम 25 वर्ष सर्विस होनी चाहिए। ब्रिगेडियर Pay level 13 A के अंतर्गत सैलरी प्राप्त करते है।

पहचान

ब्रिगेडियर अपनी ड्रेस के दोनों शोल्डर पर एक एक अशोक स्तंभ तथा तीन तीन स्टार पहनते है। इसके अतिरिक्त दोनो कॉलर पर कॉलर पैच लगाते है जिसमे एक स्टार लगा हुआ होता है। ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी जिस गाड़ी में यात्रा करते है उसमें भी नंबर प्लेट के ऊपर एक स्टार लगा होता है।




इंडियन आर्मी रैंक ब्रिगेडियर

रिटायरमेंट

ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी भारतीय सेना में 56 वर्ष की आयु तक सर्विस कर सकते है।

मेजर जनरल

भारतीय सेना में ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी को सिलेक्शन द्वारा मेजर जनरल के रैंक पर प्रमोट किया जाता है। ब्रिगेडियर से मेजर जनरल प्रमोट होने के लिए कमीशन के बाद 32 वर्ष सर्विस होनी चाहिए। मेजर जनरल रैंक के अधिकारी Pay level 14 के अंतर्गत सैलरी प्राप्त करते है।

पहचान

मेजर जनरल अपने दोनो शोल्डर पर crossed baton & sabre (कैंची के आकार की) तथा स्टार पहनते है। इसके अतिरिक्त दोनो कॉलर में कॉलर पैच पहनते है जिसमे दो स्टार लगे होते है। मेजर जनरल जिस गाड़ी में यात्रा करते है उसमें भी नंबर प्लेट के ऊपर दो स्टार लगे होते है।

इंडियन आर्मी रैंक मेजर जनरल

रिटायरमेंट

मेजर जनरल रैंक के अधिकारी 58 वर्ष की आयु तक सर्विस कर सकते है।

लेफ्टिनेंट जनरल

मेजर जनरल रैंक के अधिकारी को सिलेक्शन द्वारा लेफ्टिनेंट जनरल रैंक पर प्रमोट किया जाता है। लेफ्टिनेंट जनरल बनने के लिए कमिशन के बाद 36 वर्ष सर्विस होना अनिवार्य है। भारतीय सेना में वाईस चीफ यफ आर्मी, आर्मी कमांडर, GOC लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारी होते है। लेफ्टिनेंट जनरल पोस्ट अनुसार Pay लेवल 15 -17 की सैलरी प्राप्त करते है।

पहचान

लेफ्टीनेंट जनरल रैंक के अधिकारी अपने दोनों शोल्डर पर कैंची शेप (crossed baton & sabre) तथा अशोक स्तंभ लगाते है। इस रैंक के अधिकारी के कॉलर पैच पर तीन स्टार लगे हुए होते है। इस रैंक के आर्मी अफसर जब गाड़ी में यात्रा करते है तो गाड़ी की नंबर प्लेट के ऊपर तीन स्टार लगे हुए होते है।

इंडियन आर्मी रैंक लेफ्टिनेंट जनरल

रिटायरमेंट

लेफ्टिनेंट जनरल 60 वर्ष की आयु तक आर्मी में सर्विस कर सकते है।

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इंडियन आर्मी रैंक जनरल

जनरल रैंक का अधिकारी इंडियन आर्मी केवल एक ही होता है जो कि लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारी को जनरल रैंक में प्रमोट किया जाता है। जनरल पूरी भारतीय थल सेना को कमांड करता है तथा वह सिविल में कैबिनेट सेक्रेटरी के बराबर का पदाधिकारी होता है। इंडियन आर्मी जनरल Pay level 18 के अंतर्गत सैलरी प्राप्त करता है।


पहचान

इंडियन आर्मी जनरल के दोनों शोल्डर पर अशोक स्तम्ब, स्टार तथा कैंची शेप्ड (crossed baton & sabre) लगे होते है तथा कालर पैच पर 4 स्टार लगे हुए होते है। जब भी इंडियन आर्मी जनरल गाड़ी में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते है तो उनकी गाड़ी की नंबर प्लेट के ऊपर 4 स्टार लगे हुए होते है।

इंडियन आर्मी रैंक जनरल

रिटायरमेंट

इंडियन आर्मी जनरल 62 वर्ष आयु तक या 3 वर्ष तक COAS सर्विस तक जो भी पहले समाप्त हो।

दोस्तो यह थी इंडियन आर्मी रैंक के बारे में सम्पूर्ण जानकारी। यह पोस्ट आपको कैसी लगी कमेंट करके अवश्य बताये।

जय हिंद जय भारत

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