National Pension Scheme क्या है। NPS rules तथा टैक्स बेनिफिट्स




National Pension Scheme (NPS) जिसे हम न्यू पेंशन स्कीम भी कहते है, 1 जनवरी 2004 से लागू की गई थी। NPS को लागू करने का मुख्य कारण सरकार पर पेंशन के बढ़ते हुए अमाउंट को कम करना था। National Pension System लागू होने से केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार की सरकारी नोकरियो में काम कर रहे एम्प्लोयी नई पेंशन स्कीम के दायरे में आ गए थे। वर्ष 2004 से पहले से भर्ती कर्मचारियों को Old Pension Scheme के तहत ही पेंशन मिलती है। 1 जनवरी 2004 से भर्ती होने वाले सरकारी कर्मचारी New Pension Scheme के तहत पेंशन प्राप्त करते है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इंडियन डिफेंस फोर्सेज (आर्मी, नेवी तथा एयरफोर्स) New Pension Scheme के दायरे में नही आती है। पैरामिलिटरी फोर्सेज CRPF, BSF, ITBP, CISF तथा SSB भी New Pension System के तहत पेंशन प्राप्त करती है। पैरामिलिटरी फ़ोर्स द्वारा काफी लंबे समय से दोबारा ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने की मांग उठ रही है परन्तु अभी तक यह सम्भव नही हो पाया है।



आइए अब बात करते है कि New Pension Scheme जिसे शार्ट फॉर्म में NPS भी कहते है, के बारे में डिटेल से।

National Pension Scheme

National Pension Scheme

NPS एक कॉन्ट्रिब्यूशन पेंशन स्कीम है जिसे वर्ष 1 जनवरी 2004 से लागू किया गया था। आरम्भ में यह पेंशन स्कीम केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए थी परन्तु वर्ष 2009 से 18 वर्ष से 60 वर्ष की आयु तक कोई भी भारतीय National Pension Scheme का सब्सक्राइबर बन सकता है।

NPS में केंद्रीय कर्मचारियों को अपनी बेसिक सैलरी तथा महंगाई भत्ता का 10% प्रति महीना नेशनल पेंशन स्कीम में कंट्रीब्यूट करना होता है तथा उतना ही अमाउंट केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारी के PRAN (Permanent Retirement Account Number) में जमा किया जाता है। उसके पश्चात उस पैसे को इंसोरेंस कंपनी में इन्वेस्ट किया जाता है। इन्वेस्ट किये गए इस पैसे से जो रिटर्न्स मिलता है उसे कर्मचारी को पेंशन के रूप में मिलता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि दिसंबर 2018 में केंद्र सरकार ने नेशनल पेंशन स्कीम में कुछ महत्वपूर्ण अपडेट किये है। नए अपडेट अनुसार, केंद्र सरकार नेशनल पेंशन स्कीम में कर्मचारी के एकाउंट में 10% की बजाय 14% प्रति महीना कंट्रीब्यूट करेगी जबकि केंद्रीय कर्मचारी का कॉन्ट्रिब्यूशन 10% ही रहेगा। इसके अतिरिक्त कर्मचारियों को टैक्स बेनिफिट भी मिलेंगे। वर्ष 2018 में किये गए अपडेट की पूरी लिस्ट इस पोस्ट के अंत मे दी गयी है।


National Pension Scheme Rules & info

  1. National Pension Scheme को दो tier में लांच किया गया था। Tier – 1 केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अनिवार्य (कंपलसरी) है जिसमे केंद्रीय कर्मचारी तथा केंद्र सरकार को बेसिक सैलरी तथा DA का 10% पैसा NPS में इन्वेस्ट करना होता है।
  2. Tier II ऑप्शनल है जिसमे केंद्रीय कर्मचारी जितना चाहे उतना अमाउंट इन्वेस्ट कर सकते है परन्तु केंद्र सरकार Tier II में जीरो अमाउंट कंट्रीब्यूट करती है।
  3. नेशनल पेंशन स्कीम के लिए केंद्रीय कर्मचारियों का PRAN (Permanent Retirement Account Number) ओपन किया जाता है जिसमे उनके द्वारा किये गए कॉन्ट्रिब्यूशन, withdrawl, रिटर्न्स इत्यादि की पूरी जानकारी अपडेट रहती है।
  4. नेशनल पेंशन स्कीम को नियंत्रित तथा विकशित करने के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा एक एजेंसी का गठन किया गया जिसका नाम है PFRDA (Pension Fund Regulatory & Development Agency)
  5. PFRDA के देखरेख में NSDL (National Securities Depositories Limited) NPS फण्ड को मैनेज करती है तथा सभी PRAN (परमानेंट रिटायरमेंट एकाउंट नंबर) को अपडेट रखती है। NSDL फण्ड मैनेजर द्वारा पेंशन स्कीम में पैसे को निवेश किया जाता है।
  6. NPS स्कीम में पैसा मुख्यत LIC, SBI Life Insurance तथा UTI म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश किया जाता है।




NPS Fund withdrwal Rules

National Pension Scheme से सब्सक्राइबर अपने द्वारा जमा की गई राशि का कुछ अमाउंट पेंशन स्कीम से withdraw कर सकते है। इसके लिए कुछ टर्म्स कंडीशन है जिन्हें फॉलो करना अनिवार्य है।

NPS News

Terms & condition for NPS withdrawl

  1. NPS सब्सक्राइबर बनने के 3 वर्ष के बाद ही NPS से partial withdrawl (कुछ अमाउंट) किया जा सकता है यानी प्रथम 3 वर्ष में सब्सक्राइबर पैसे नही withdraw कर सकते है।
  2. Withdrawl में केवल सब्सक्राइबर द्वारा जमा राशि का 25% तक ही निकाला जा सकता है। Partial NPS withdrawl में गवर्मेंट कॉन्ट्रिब्यूशन को नही withdraw किया जा सकता है।
  3. NPS में एक सब्सक्राइबर पूरी सर्विस के दौरान केवल 3 बार ही पैसे withdraw कर सकता है।
  4. NPS partial Withdrawl कुछ स्थितियों में ही किया जा सकता है जो कि इस प्रकार है :-
  • बच्चों की हायर एजुकेशन के लिए
  • बच्चों की शादी के लिए
  • घर के निर्माण या खरीदारी के लिए
  • गंभीर बीमारी के इलाज के लिए

Partial withdrawl के अतिरिक्त जब भी सब्सक्राइबर NPS को बंद करता है तो उसे कुछ लम्प सम अमाउंट मिलता है तथा सब्सक्राइबर द्वारा जमा की गई राशि का कुछ भाग annuity के लिऐ इन्वेस्ट किया जाता है ताकि 60 वर्ष उम्र के बाद उसे पेंशन मिल सके। अब बात करते है कि किस किस केस में सब्सक्राइबर NPS (National Pension Scheme) बंद कर सकता है

रिटायरमेंट के समय NPS से exit (बाहर आना)

जब भी सरकारी कर्मचारी या पैरामिलिटरी फ़ोर्स का जवान अपनी सर्विस कम्पलीट करके 60 वर्ष की आयु में रिटायर होता है तो वह NPS से एग्जिट होता है। उस समय वह कूल पेंशन फण्ड में जमा राशि (कर्मचारी कॉन्ट्रिब्यूशन + गवर्मेंट कॉन्ट्रिब्यूशन) का 60% राशि निकाल सकता है। बची हुई 40% राशि एन्युटी में इन्वेस्ट करनी होती है ताकि उसे रेगुलर पेंशन मिल सके।

यदि सब्सक्राइबर के पेंशन फण्ड में रिटायरमेंट के समय कूल राशि 2 लाख या उससे कम है तो वह पूरी राशि रिटायरमेंट के समय निकाल सकता है। इस स्थिति में उसे कोई भी पेंशन नही मिलती है।

Premature Exit from NPS

यदि पैरामिलिटरी जवान या सिविल कर्मचारी NPS से समय से पहले exit करता है तो उसे जमा कूल राशि का केवल 20% ही लम्प सम अमाउंट NPS बन्द करने पर मिलता है तथा शेष 80% अमाउंट एन्युटी के लिए इन्वेस्ट किया जाता है जो कि उसे 60 वर्ष की आयु के पश्चात रेगुलर पेंशन के रूप में मिलता रहता है। 10 वर्ष होने के पश्चात ही NPS सब्सक्राइबर नेशनल पेंशन स्कीम से एग्जिट हो सकते है

यदि Premature exit के समय पेंशन फण्ड में जमा कुल राशि 1 लाख या उससे कम है तो पैरामिलिटरी पर्सन 100% फण्ड withdraw कर सकते है।

सब्सक्राइबर की मृत्यु होने पर

यदि सब्सक्राइबर की किसी कारणवश मृत्यु हो जाती है तो पेंशन फण्ड में जमा 100% राशि उसके NOK को दी जाती है।

NPS सब्सक्राइबर 60 वर्ष की आयु के पश्चात भी चाहे तो NPS में अपना कॉन्ट्रिब्यूशन कंटिन्यू कर सकता है। रिटायरमेंट होने के पश्चात 70 वर्ष की आयु तक NPS को कंटिन्यू किया जा सकता है। इसी प्रकार यदि पैरामिलिटरी पर्सन रिटायरमेंट के पश्चात लम्प सम अमाउंट निकालना नही चाहता तो वह NPS में 70 वर्ष की आयु तक इन्वेस्ट रख सकता है।

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National Pension Scheme Tax Benefits

    1. पैरामिलिटरी फ़ोर्स पर्सन तथा सिविल कर्मचारी सेक्शन 80 CCD(1) के तहत ग्रॉस इनकम में 10% टैक्स छूट प्राप्त कर सकते है।
    2. जब भी NPS सब्सक्राइबर PRAN एकाउंट से partial withdraw (25% तक) करता है तो वह लम्प सम अमाउंट टैक्स फ्री होता है उस पर कोई भी टैक्स नही लगता है।
    3. रिटायरमेंट के समय जब 40% अमाउंट annuity के लिए इन्वेस्ट किया जाता है तो वह 40% अमाउंट टैक्स फ्री होता है परन्तु आने वाले वर्ष में उससे होने वाली इनकम पर टैक्स लगता है। दूसरे शब्दों में कहे तो मिलने वाली पेंशन पर टैक्स लगता है।
    4. रिटायरमेंट के समय जब पैरामिलिटरी सोल्जर या सिविल कर्मचारी 60% अमाउंट withdraw करता है तो वह लम्प सम राशि भी इनकम टैक्स के दायरे में नही आती है।उस फाइनल withdrawl में उसे पूरी तरह से टैक्स में छूट मिलती है।
    5. NPS tier 1 (पैरामिलिटरी तथा सिविल कर्मचारी) एकाउंट होल्डर को 50000 रुपये तक के इन्वेस्टमेंट पर सेक्शन 80 CCD(1B) के तहत अतिरिक्त टैक्स रियायत मिलती है।

जैसा की पहले बात की कि वर्ष 2004 में NPS को लागू किया गया था परन्तु NPS को आकर्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार इसमें समय समय पर बदलाव करती है। NPS में एक बड़ा अपडेट दिसंबर 2018 में आया जब केंद्र सरकार ने Tier 1 एकाउंट होल्डर के कॉन्ट्रिब्यूशन में गवर्मेंट की हिस्सेदारी बढ़ाई। आइए बताते है NPS में दिसंबर 2018 में हुए बदलाव के बारे में।



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NPS news & update december 2018

  1. NPS में दिसंबर 2018 में सबसे बड़ा अपडेट गवर्मेंट कॉन्ट्रिब्यूशन को लेकर हुआ। इससे पहले कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी तथा महंगाई भत्ते का 10% कंट्रीब्यूट करते थे तथा केंद्र सरकार भी 10% कंट्रीब्यूट करती थी। दिसंबर 2018 में हुए अपडेट अनुसार, अब केंद्र सरकार 10% की बजाय 14% कंट्रीब्यूट करेगी तथा एम्प्लोयी 10% ही कंट्रीब्यूट करेंगे। यह पैरामिलिट्री फ़ोर्स तथा केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सरकार की एक अच्छी पहल है।
  2. दूसरा सबसे बड़ा अपडेट NPS में tax को लेकर हुआ। Maturity के समय 60% लम्प सम अमाउंट मिलता है। पहले 60% में 40% टैक्स फ्री होता था तथा 20% पर केंद्रीय कर्मचारियों को टैक्स देना होता था। अब पूरा 60% मैच्यूरिटी अमाउंट टैक्स फ्री होगा तथा उस अमाउंट पर कोई भी टैक्स नही लगेगा।
  3. पहले National Pension Scheme के सब्सक्राइबर को यह छूट नही मिलती थी कि उनके द्वारा पेंशन फण्ड में जमा राशि को कहा इन्वेस्ट किया जाए। PFRDA द्वारा नियुक्त फण्ड मैनेजर PFRDA की देखरेख में पेंशन फण्ड को इन्वेस्ट करते थे परन्तु अब ऐसा नही। नए अपडेट अनुसार, केंद्रीय कर्मचारी को यह स्वतंत्रता होगी कि वह अपने पेंशन फण्ड के पैसे कहा इन्वेस्ट करना चाहता है। वर्ष में एक बार केंद्रीय कर्मचारी अपना इन्वेस्टमेंट एक फण्ड से दूसरे फण्ड में स्विच कर सकेंगे।

आब बात करते है NPS से सम्बंधित कुछ सवालों के बारे में जो बार बार पूछे जाते है।

नेशनल पेंशन स्कीम को मुख्य रूप से 3 प्रकार से बंद किया जा सकता है।

रिटायरमेंट के समय – 60 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट के समय NPS मच्यूर हो जाती है तथा उस कंडीशन में सब्सक्राइबर कुल जमा राशि का 60% निकाल सकता है तथा 40% अमाउंट पेंशन फण्ड में इन्वेस्ट होता है जिसकी उसे पेंशन मिलती है।

Premature – यदि कोई सिविल कर्मचारी समय से पहले रिजाइन करता है या रिटायर होता है तो भी वह NPS को बंद कर सकता है। इस सिचुएशन में उसे कुल पेंशन फण्ड का 20% अमाउंट ही मिलता है तथा शेष एन्युटी के लिए इन्वेस्ट हो जाता है।

डेथ – यदि किसी कारणवश सब्सक्राइबर की मृत्यु हो जाती है तो NPS बन्द हो जाती है। इस सिचुएशन में उसके पेंशन एकाउंट में जमा राशि को NOK को दी जाती है।

जी हा NPS को जॉइन करना केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है। नेशनल पेंशन स्कीम के tier I को जॉइन करना कंपलसरी है जसमे सरकारी कर्मचारी अपनी बेसिक पे तथा महंगाई भत्ते का 10% कंट्रीब्यूट करते है तथा केंद्र सरकार 14% कंट्रीब्यूट करती है। टियर II ऑप्शनल होता है जिसमे सब्सक्राइबर अपनी मर्जी से कंट्रीब्यूट करता है परन्तु सरकार कोई भी अमाउंट कंट्रीब्यूट नही करती है।

जब NPS 1 जनवरी 2004 को लागू की गई थी उस समय केवल केंद्रीय कर्मचारी ही नेशनल पेंशन स्कीम को जॉइन कर सकते थे तथा 1 जनवरी 2004 या उसके बाद सिविल जॉब जॉइन करने वाले कर्मचारियों की ओल्ड पेंशन बन्द कर दी गयी थी।

वर्ष 2009 से NPS को केंद्रीय कर्मचारियों के अलावा अन्य प्राइवेट कंपनी के एम्प्लोयी या गैर संगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगो के लिए भी शुरू कर दिया गया था। 18 वर्ष से 60 वर्ष तक कि आयु का कोई भी भारतीय नेशनल पेंशन स्कीम का सब्सक्राइबर बन सकता है

दिसंबर 2018 में हुए अपडेट से पहले सब्सक्राइबर के पास यह स्वतंत्रता नही थी कि वो अपनी इच्छानुसार फण्ड चुनकर उनमें अपने पेंशन फण्ड को इन्वेस्ट करे। इससे पहले पेंशन फण्ड को NSDL फण्ड मैनेजर द्वारा पेंशन फण्ड में निवेश किया जाता था।

2018 में NPS में हुए बदलाव के बाद, NPS सब्सक्राइबर अपनी मर्जी से फण्ड चुन सकते है परन्तु वे केवल वर्ष में एक बार ही ऐसा कर सकेंगे। नेशनल पेंशन स्कीम में सब्सक्राइबर अब 15% की बजाय 25% तक फण्ड इक्विटी में इन्वेस्ट कर सकेंगे।

नेशनल पेंशन स्कीम से मिलने वाली पेंशन शेयर मार्केट के ऊपर निर्भर करती है। सब्सक्राइबर के द्वारा किया गया कॉन्ट्रिब्यूशन गवर्मेंट फण्ड तथा इक्विटी में NSDL के फण्ड मैनेजर द्वारा इन्वेस्ट किया जाता है तथा उससे मिलने वाला रिटर्न्स रिटायरमेंट के पश्चात सब्सक्राइबर को पेंशन के रूप में दिया जाता है। इन्वेस्ट किये गए अमाउंट से एक वर्ष में आने वाले रिटर्न्स को 12 हिस्सो में बांटकर प्रति महीना पेंशन के रूप में दिया जाता है।

NPS में जॉइन होने के पश्चात सब्सक्राइबर मैच्यूरिटी तक पैसे नही निकाल सकते है। NPS जॉइन होने के बाद पार्शियल withdrawl किया जा सकता है। National Pension Scheme जॉइन करने के 3 वर्ष बाद सब्सक्राइबर द्वारा जमा की गई राशि का 25% तक निकाला जा सकता है। इस 25% मे गवर्मेंट का कॉन्ट्रिब्यूशन नही जोड़ा जाता है।

नेशनल पेंशन स्कीम में केंद्रीय कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी तथा महंगाई भत्ते का 10% कंट्रीब्यूट करते है तथा केंद्रीय सरकार बेसिक सैलरी तथा महंगाई भत्ते का 14% कंट्रीब्यूट करती है। दिसंबर 2018 में कैबिनेट ने नेशनल पेंशन स्कीम में कुछ अपडेट किये है। इन अपडेट से पहले केंद्र सरकार 10% कंट्रीब्यूट करती थी।

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दोस्तो दिसंबर 2018 के अपडेट अप्रैल 2019 से लागू होंगे जिसमे पैरामिलिट्री फ़ोर्स तथा अन्य केंद्रीय कर्मचारियों को टैक्स बेनिफिट्स मिलेंगे। दिसंबर 2018 में हुए अपडेट का फायदा लगभग 36 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को होगा।

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1 thought on “National Pension Scheme क्या है। NPS rules तथा टैक्स बेनिफिट्स”

  1. Is death or retirement gratuity available under this NPS like old pension.is state govt.employee of H.P.follow this central NPS rule 100% or some variation .kindly clerify in details.

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