Paramilitary Force Pension की बहाली क्यों हुई जरूरी?




Paramilitary force (CRPF, BSF, CISF, SSB, ITBP) भारतीय रक्षा तंत्र का अहम हिस्सा है तथा वह भारतीय सेना के साथ कदम से कदम मिलाकर चलती है। चाहे वह जम्मू कश्मीर में पथरबाजी हो या छत्तीसगढ़ में नक्सलिस्म या बॉर्डर की रक्षा करने का जिम्मा हो। पैरामिलिटरी फ़ोर्स हर स्थान पर अपना कर्तव्य बखूबी निभाती है काफी समय से paramilitary force pension की ओल्ड पेंशन स्कीम को दोबारा लागू करने की मांग उठ रही है।


जब भी कही देश मे किसी भी प्रकार की अपर्यायी घटना होती है तो वहा पर पैरामिलिटरी फ़ोर्स को याद किया जाता है लेकिन जब बात आती है पैरामिलिटरी के जवानों के अधिकारों की तो उस समय पैरामिलिटरी फोर्सेज कहि भी दिखाई नही देती।

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क्या पैरामिलिटरी फ़ोर्स को 1 जनवरी 2004 से पहले वाली रेगुलर पेंशन मिलनी चाहिए?
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Paramilitary Force Pension Scheme

2004 से पहले पैरामिलिटरी के जवानों को भी भारतीय सेना की तरह रेगुलर पेंशन मिलती थी परन्तु 1 जनवरी 2004 से पैरामिलिटरी फ़ोर्स को सिविलियन की तरह NPS (National pension Scheme) के अंतर्गत लाया गया। नेशनल पेंशन स्कीम एक रेगुलर पेंशन होने की बजाय contributory पेंशन स्कीम है जिसमे पैरामिलिटरी के जवान को हर महीने अपने वेतन से 10% कॉन्ट्रिब्यूशन करना होता है तथा 10% कॉन्ट्रिब्यूशन केंद्र सरकार करती है।



इस Paramilitary force pension scheme के अंतर्गत जमा किये गए पैसे को इक्विटी तथा गवर्मेंट बांड में इन्वेस्ट किया जाता है तो जो रिटर्न्स मिलता है वो पैरामिलिटरी के जवान को रिटायरमेंट के समय पेंशन के रूप में दिया जाता है। यहां पर प्रशन यह है कि पैरामिलिटरी की कार्यशैली लगभग मिलिट्री के समान होते हुए भी उन्हें एक सिविलियन की तरह ट्रीट किया जाता है क्योंकि वो डिफेंस मिनिस्ट्री की बजाय होम मिनिस्ट्री के नीचे काम करते है। paramilitary pension के अलावा भी बहुत सारे मुद्दे है जो पैरामिलिटरी से जुड़े हुए है जैसे OROP, paramilitary service pay तथा old pension scheme.

पैरामिलिटरी के जवानों की ड्यूटी भी काफी मुश्किल होती है। उन्हें बार बार एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रेवल करना होता है, उनके लिए पीस पोस्टिंग बहुत मुश्किल से आती है, 12 से 15 घण्टे लगातार डयूटी होती है, छुट्टिया भी समय से नही मिल पाती तथा रहने तथा खाने पीने से सम्बंधित परेशानियां पहले भी मीडिया में उठाई जा चुकी है तथा डिस्टर्ब एरिया में नॉकरी करना काफी कठिन होता है


ऐसी परिस्थितियों में नॉकरी करने वाले जवानों को सिविलियन की तरह वेतन देना उचित नही है। सरकार को चाहिए कि पैरामिलिटरी के जवानों की परेशानियों को समझकर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करें जिसमे जवानों का परामर्श अनिवार्य किया जाए।
सन 2003 में जब नई paramilitary force pension scheme लागू हुई थी उस समय भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी इसलिए वर्तमान में केंद्र सरकार को चाहिए कि उस समय केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई नीति की गलतियों को अब सुधारे। जवानों को भर्ती के समय ऑप्शन मिलना चाहिए कि वो नई नीति से पेंशन लेना चाहते है या रेगुलर पेंशन या फिर सरकार NPS में अपना कॉन्ट्रिब्यूशन 25% करे। इस प्रकार पेंशन स्कीम को कारगर बनाया जा सकता है

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जय हिन्द जय भारत

21 thoughts on “Paramilitary Force Pension की बहाली क्यों हुई जरूरी?”

  1. Miliatry & Para Miliatry dono ek jagha ek hi location m duty krte hai isliye dono me koi different nhi sochna chahiye. Jai hind jai bharat

  2. sushil kumar pramanik

    army aur paramilitary mey koi farak nahi rakhna chahiye nahi too ak din bahut bara sangharsh ho sakta hai a adhikar ko lekar please modi jee aap hi a kar sakta hai jai hind jai bharat jai jawan jai paramilitary

  3. Paramilitary forces ko am civilian ki tarah kyu samajte ho
    Vo to udhar upni jan pe kelkar duty karte hai app ne uski pension band karava di ye kaha ka insaf hai
    Phir bhi mera nivedan hai ki mere paramilitary bhai yo nko unka huck dedo

    Jai hind

  4. Bahut jroori hai penson hak hai jo kisi bhee parisathpa me ladne k liye tyar rahte hai o bhee apne ghar se door aaj unhi ki penson government ne band ki hai … bahut galt hai..

  5. Pension hi ek aise haq hai jo retirement ke baad jeene ka sahara hota hai old pension hamara haq hai old pension milni hi chiya

  6. , यह ना इंसाफी है सरकार इस पर ध्यान दें अधिकारी तो मोन दर्शक है उन्होंने ने तो कसम खा रखी है निचे वालों को कोई फायदा नही मिलने चाहिए वा मेरी प्रजातंत्र। तुझे सलाम।।।।।।।।।।।।।।

  7. Pingback: National Pension Scheme क्या है। NPS rules तथा टैक्स बेनिफिट्स - Fouji Adda

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